प्यासा न बनाते गुरुदत्त ब्लॉगर बन जाते

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यदि गुरुदत्त आज होते तो शायद प्यासा न बनाते, क्योंकि तब उस फ़िल्म मैं उनकी नज्में कोई नही छापता था पर अब तो ब्लॉगर है और फिर कुछ इन्टरनेट विज्ञापन दाता भी हैं अब अगर गुरु दत्त को कोई नही छाप रहा होता और वे गरीब भी होते तो भी वे किसी अब्दुल जब्बार के पुराने होते कंप्यूटर पर अपनी कविता टाइप कर पोस्ट ज़रूर कर देते -,वाह, वाह, फिर क्या था टिप्पणियां आती -लगातार, लाइन से दन्न -दन्न "हिन्दी ब्लॉग जगत मैं आपका स्वागत है , लगातार लेखन के लिए धन्यवाद,आप जब हिन्दी मैं लिखते हैं तो अच्छा लगता है । बहुत सुंदर…॥आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। ‍‍ ‍‍‍ ….. फिर कोई पहले सेव और अब अंगूरों के शहर वाले भइया उन्हें बताते की ब्लॉग से पैसा कैसे कमाया जाए,कुछ गली मोहल्लों मैं उनकी चर्चा होती ,फिर क्या था उनके पास होते इनविटेशन ब्लॉगों पर लिखने के। पता चल रहा है कि भइया पिछले तीन महीने से गुरु दत्त (फ़िल्म किरदार) को उनकी माँ ने देखा ही नही है ,सब जगह उनके भाई भी ढूँढ रहे है की पता नही छोटा भाई कहाँ है,अब तो वो ब्लॉगर हो गया है,और भाभी जी परेशां है कि अभी अगर भइया आ गए और बोलने लगे की मेरी नज्मों वाली फाइल कहां है तो मैं क्या कहूँगी कि वो तो मैंने किसी कबाडी को बेच दी ,वो भी ब्लॉग पोस्टिंग के लिए । फिर कहीं किसी दिन गुरु भइया अपने भतीजे की पकड़ में आ जाते हैं । भतीजा चिल्लाता है दादी वो देखो चाचा जा रहे हैं ,दादी तो देर मैं सुन पाती है पर पहले आस-पास खड़े लोग उनके पीछे हो लेते हैं सब पकड़ लेते हैं कि भइया जरा हमारे ब्लॉग पर कोई कमेन्ट तो दे दो ,अरे ये ही लिख दो की -अच्छा लगा,या ये लिख दो की आपके द्वारा दी गई जानकारी उत्तम लगी,या ये ही लिख दो की एक नया शब्द सीखने को मिला । खैर गुरु साहब ज़रा जल्दी में हैं उन्हें एक ब्लॉगर मीट जो अटेंड करनी है ,मेरठ की ट्रेन पकड़नी है ,शायद अबकी बार कोई भिखारी रस्ते में ठण्ड से ठिठुर भी रहा होगा फिर भी गुरुदत्त साहब अपना कोट निकाल कर उसे नही देंगे क्योंकि सारे ब्लॉगर जो बैठे हैं उधर मेरठ में और फिर बिना कोट के काम कहाँ चलता है ।
खैर इस छोटे से लेख से में सिर्फ़ अपनी उपस्थिति दर्ज करना चाहता हूँ ,अपने ब्लॉग पर क्योंकि ब्लॉग पर पोस्ट न करने की दशा में चिटठा जगत में सक्रियता कम हो जाती है और फिर कोई पढ़े न पढ़े लगना चाहिए कि हम लिख रहे हैं । मैं क्षमा चाहता हूँ जो किसी को बुरा लगा हो मेरा गुरु दत्त जी के जी के बारे में लिखना ,अगर आपत्ति हो बताएं .

वो कहते हैं न कि सब कुछ बच्चा माँ के पेट से सीख कर नही आता अभी हिन्दी ब्लागिंग भी कुछ ऐसी ही स्थिति मैं नज़र आती है, ब्लॉग की मूल अवधारणा अब बदल चुकी है ,ये उन प्रकाशकों और संपादकों के मुँह पर तमाचा मरने की कोशिश करती है जो कई बार नए कवियों की कविता नही छापते और कई बार उन्हें नज़रंदाज़ करते हैं । खैर बहुत कुछ होना अभी बाकी है ,सचमुच बहुत कुछ ,लीजिये आपके लिए एक मधुर सा गाना पेश कर रहा हूँ,गुरुदत्त साहब का ............ ।

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1 Response to प्यासा न बनाते गुरुदत्त ब्लॉगर बन जाते

11:02 AM, February 28, 2009

ओह, पोस्ट पर ऑथर का नाम नहीं पर जो भी हो, बढ़िया लिखा है मित्र!
गुरुदत्त जो भी होते, क्रियेटिव होते तो किसी भी फील्ड में उत्कृष्ट होते। [Reply]

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