हजारों साल नर्गिस आपनी बेनुरी पे ........

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आज का दिन बहुत सारे मायनो में ख़ास हो सकता है । कई लोगों के लिए ये नई- नई यादों के साथ आया होगा . हम -आप ,सभी रोज कई जद्दोजहद से गुजरते हैं इसलिए कई घटनाएँ हमारे लिए नई नही होती है , तो इस हिसाब से मृणाल पाण्डेय की विदाई भी बहुत सामान्य सी घटना हो सकती है , और खासकर आज की इस दौर में जब की मीडिया सबसे खतरनाक दौर से गुजर रहा है । कोई यह सोचने वाला नही है की ये घटनाएँ क्या भविष्य बनायेंगी ? वैसे अपन इतने बड़े नही की प्रभाष जोशी की तरह मीडिया पर कोई टिपण्णी कर सकें न ही अफलातूनी सुधीश पचौरी हैं की मीडिया की हद नाप सकें पर अल्प दिमाग से जो लग रहा है , वो यहाँ कहना चाहतें है- मृणाल पाण्डेय का जाना थोड़ा दुःखदाई तो है क्योंकि यह सब एक हादसे की तरह हुआ है और हादसे हमेशा दुखद होते हैं , हर जगह लोग अपने अनुभवों के आधार पर आपनी राय दे रहे है , शशि शेखर जी ठीक आदमी हैं इसमे कोई नही शक है पर मृणाल पाण्डेय जी की विदाई सुखद है यह बात पूरी तरह गलत है के हमने उनके आंचल में पलने वाले हिनुस्तान अखबार को देखा है उसमे किए गए प्रयोग भी देखे हैं हो न हो वे पत्रकारिता के नए मापदंड थे और उन्हें खारिज नही किया जा सकता , लेआउट से लेकर कंटेंट तक में एक रचनात्मकता थी इसे कोई नकार नही सकता , हजारों साल नर्गिस आपनी बेनुरी पर तरसती है बड़ी मुश्किल से पैदा होता चमन में दीदावर , यह लेख म्रणाल पाण्डेय की इस्तुती नही है और न ही शशि शेखर के आने का गम । हम उम्मीद करतें हैं की शेखर जी हमे निराश नही करेंगे और मृणाल पाण्डेय जी जल्दी ही नई कसौटी हमारे सामने प्रस्तुत करेंगी । दिल्ली डायरी

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3 Response to हजारों साल नर्गिस आपनी बेनुरी पे ........

7:32 PM, August 31, 2009

dekh lena [Reply]

12:53 AM, September 02, 2009

हम सभी ने हिन्दुस्तान अखबार और उसमे किए गए प्रयोगों को भी देखा हैं, वे पत्रकारिता के नए मापदंड थे और उन्हें खारिज भी नहीं किया जाना चाहिए! लेआउट से लेकर कंटेंट तक में एक रचनात्मकता को साफ़ तौर पर देखा जा सकता था! हिंदुस्तान ने बदतले वक़्त के साथ खुद को बदला है,और इसका श्रेय मृणाल जी को ज़रूर जाता है ,और हम उम्मीद करते हैं कि शशि शेखर के आने के बाद भी "हिन्दुस्तान " इसी तरह पाठकों की उम्मीदों पर खरा उतरेगा [Reply]

8:10 AM, September 02, 2009

"हम उम्मीद करतें हैं की शेखर जी हमे निराश नही करेंगे और मृणाल पाण्डेय जी जल्दी ही नई कसौटी हमारे सामने प्रस्तुत करेंगी । "

यह आशा ही सम्बल है । प्रविष्टि का आभार । [Reply]

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