अधिनायक

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इस गणतंत्र दिवस पर मेरे प्रिय कवि रघुवीर सहाय की कविता अधिनायक आप लोगों के लिए
राष्ट्रगीत में भला कौन
वह भारत-भाग्य-विधाता है
फटा सुथन्ना पहने जिसका
गुन हरचरना गाता है।
मखमल टमटम बल्लम तुरही
पगड़ी छत्र चंवर के साथ
तोप छुड़ाकर ढोल बजाकर
जय-जय कौन कराता है।
पूरब-पश्चिम से आते
हैं नंगे-बूचे नरकंकाल
सिंहासन पर बैठा,
उनकेतमगे कौन लगाता है।
कौन-कौन है वह जन-गण-मन
अधिनायक वह महाबली
डरा हुआ मन बेमन जिसका
बाजा रोज बजाता है






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3 Response to अधिनायक

7:55 AM, January 26, 2010

यथार्थ की सुंदर अभिव्यक्ति! [Reply]

11:33 PM, January 26, 2010

"मखमल टमटम बल्लम तुरही,
पगड़ी छात्र चंवर के साथ,
टॉप चुदाकर ढोल बजाकर,
जय जय कौन करता है." - बहुत सुन्दर [Reply]

3:48 PM, January 28, 2010

कविता की प्रस्तुति का आभार । [Reply]

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