स्वप्न का जीवन

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तुम मेरे सपनों में साथ चलो,
मैं तुम्हारे स्वप्न संवारूँगा।
कुछ कदम जो मेरे साथ चलो,
मैं हर पल तुम्हे पुकारूँगा।

तुम बिन मैं या मुझ बिन तुम,
ये मेरे बस की बात नहीं।
इस आधे आधे जीवन को,
मैं पूरे मन से बिता दूंगा

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1 Response to स्वप्न का जीवन

9:48 AM, December 16, 2015

Excellent example of thought…!!!! Love it Nehru jacket
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